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Monday, 5 February 2018

जानें क्यों होता है होलिका-दहन?


भारत त्यौहारों और उत्सवों का देश है। यहाँ के लोग हर त्यौहार को बड़े ही धूम धाम और उत्साह के साथ मनाते हैं। भारत देश में हज़ारों त्यौहार मनाये जाते हैं परन्तु किसी भी त्यौहार में लोगों का उत्साह कम नहीं होता है। ऐसे ही त्योहारों में से एक त्यौहार है होली का त्यौहार। होली रंगों का त्यौहार है। रंगों के इस त्यौहार में लोग सारे लड़ाई झगडे भूल कर एक दूसरे को गले लगाते हैं और साथ रंग खेलते हैं।

होली के इस त्यौहार के एक रात पहले होलिका जलाई जाती है। इस लेख में हम जानेंगे की आखिर क्यों जलाई जाती है होली ?

विष्णु-पुराण के अनुसार दैत्यराज हिरन्यकश्यप का पुत्र था प्रहलाद। प्रह्लाद जो की भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। परन्तु हिरण्यकश्यप को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी। क्यूंकि वह अपने आप को भगवान विष्णु से भी बड़ा और ताकतवर मानता था। प्रह्लाद भगवान विष्णु  की भक्ति में हमेशा लीन रहता था। इस वजह से हिरण्यकश्यप ने कई बार अपने पुत्र की हत्या का प्रयास किया और असफल रहा।  हर बार प्रह्लाद की रक्षा करने स्वयं भगवान् विष्णु आये। हिरण्यकश्यप की बहन थी होलिका। होलिका को यह वरदान प्राप्त था की उस पर आग का कोई प्रभाव नहीं होगा। हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ जाए जिससे प्रह्लाद की मृत्यु हो जाए और होलिका बच जाए। परन्तु इस बार ठीक उल्टा हुआ ,भगवान् विष्णु कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई।  तब से लेकर आज तक लोग होलिका की इस हार को बड़े धूम धाम और उत्साह के साथ मनाते हैं।

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