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Monday, 22 January 2018

जानिए क्यों है नेता जी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु एक रहस्य ?


भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नायक सुभाष चन्द्र बोस का आज जन्म दिन है।  नेता जी का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक में हुआ था। इनके पिता का नाम 'जानकीनाथ बोस' और माँ का नाम 'प्रभावती' था। उनकी शिक्षा कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई। भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था किंतु उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया।

नेता जी स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरबिंदो के विचारों से प्रभावित थे ऐसे में वो आईसीएस बनकर वह अंग्रेजों की गुलामी कैसे कर पाते इसलिए उन्होंने आईसीएस से इस्तीफ़ा दे दिया। 

1921 में सिविल सर्विस छोड़ने के बाद वो भारत लौट आए और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए। बोस का मानना था कि अंग्रेजों के दुश्मनों से मिलकर आज़ादी हासिल की जा सकती है।

उनके विचारों के देखते हुए उन्हें ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता में नज़रबंद कर लिया लेकिन वह अपनी चतुराई और तेज दिमाग की वजह से वहां से भाग निकले। उन्हें कुल 11 बार कारावास की सजा हुई। 

सुभाष चंद्र बोस ने 1937 में अपनी सेक्रेटरी और ऑस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था।

21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। 

जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका जन्म दिन धूमधाम से मनाया जाता है। नेता जी ने ही "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" और "दिल्ली चलो" का नारा दिया था। 

नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है। उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे। यदि ऐसा नहीं है तो भारत सरकार ने उनकी मृत्यु से सम्बंधित दस्तावेज़ अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किये? 18 अगस्त 1945 के दिन नेताजी कहाँ लापता हो गये और उनका आगे क्या हुआ यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य बन गया हैं।

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