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Wednesday, 10 January 2018

इसरो की मदद से 12 जनवरी को 31 उपग्रह छोड़ेगा भारत : इसरो से जुड़े कुछ रोचक तथ्य


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन या  Indian Space Research Organisation, ISRO भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है जिसका मुख्यालय बेंगलुरू कर्नाटक में है। इसरो की इस उपलब्धि से हर भारतीय नागरिक का सर भी गर्व से ऊँचा हो जाता है। आज भारत न सिर्फ अपने अंतरिक्ष संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है बल्कि दुनिया के बहुत से देशों को अपनी अंतरिक्ष क्षमता से व्यापारिक और अन्य स्तरों पर सहयोग कर रहा है।

आज हम आपको भारत की अंतरिक्ष स्पेस एजेंसी ISRO के बारे में बहुत विस्तृत जानकारी देने वाले हैं-

  • इसरो में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत हैं।
  • संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष संबधी तकनीक उपलब्ध करवाना है।
  • इसरो की स्थापना 15 अगस्त, 1969 को स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रसिद्द वैज्ञानिक विक्रम साराभाई द्वारा की गई थी। 
  • डॉ. विक्रम ए. साराभाई को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों का संस्थापक माना जाता है।
  • भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट, यह गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। इसने 5 दिन बाद काम करना बंद कर दिया था।
  • इसरो का पहला रॉकेट इतना हल्का था कि इसे साईकिल पर आसानी ले जाया गया था एवं दूसरा रॉकेट भारी होने के कारण बैलगाड़ी में प्रक्षेपण के लिए ले जाया गया था। 
  • एप्पल (एरियन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरिमेंट) (Ariane Passenger Payload Experiment) भारत में निर्मित प्रथम संचार उपग्रह था। 
  • आज पूरे भारत में इसरो के 13 सेंटर हैं। 
  • इसरो ने 15 फरवरी 2017 को पीएसएलवी (PSLV) रॉकेट से 104 सेटेलाइटों को एक साथ अंतरिक्ष में स्थापित करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
  • भारत 12 जनवरी को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह काटरेसैट सहित 31 उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगा। 
  • इसरो ने अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह के सफर को पूरा कर लिया था जबकि अमेरिका, रूस और यूरोपीय देशों को कई प्रयासों में सफलता हासिल हुई थी। 
  • इसरो का मंगल मिशन में कुल खर्च सिर्फ 7.3 करोड़ डॉलर था जबकि नासा द्वारा किये गये मार्स लांच में 67.1 करोड़ डॉलर का खर्च हुआ था।
  • पिछले 40 सालों में इसरो का खर्च नासा के 1 साल के बजट के आधे से भी कम रहा है।
  • इसरो में ऐसे अधिकतम वैज्ञानिक हैं जिन्होंने शादी तक नहीं की और पूरा जीवन इसरो को समर्पित कर दिया। हमारे पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम भी उनमें से एक हैं। 
  • दुनिया में सिर्फ 6 अंतरिक्ष एजेंसियों के पास ही धरती से अंतरिक्ष में सैटेलाइट छोड़ने की क्षमता है, इसरो भी दुनिया की इन 6 एजेंसियों में से एक है। 
  • इसरो ने भुवन नाम का एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है जो google earth जैसा है।  इसकी मदद से भारत के किसी भी हिस्से की 3डी तस्वीर इंटरनेट पर देखी जा सकती है। 
  • इसरो अब तक 20 देशों के अलग अलग 57 उपग्रह लांच कर चुका है। 
  • इसरो एजेंसी का कुल बजट केंद्र सरकार के खर्चे का मात्र 0.34 प्रतिशत ही है जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 0.08 प्रतिशत है। 
  • पिछले 3 सालों में इसरो ने 8 देशों की करीब 44 सेटेलाइट लांच की है जिससे 692 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है। 
  • इसरो अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की दिशा में भी काम कर रहा है। 
  • सिवन के वर्तमान में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में निदेशक हैं, वह ए एस किरण कुमार का स्थान लेंगे जिनकी नियुक्ति 12 जनवरी 2015 को हुई थी। 




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