जानिये क्या है भानगढ़ किले का भूतिया रहस्य ? - BABAJIFANCLUB

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Saturday, 28 October 2017

जानिये क्या है भानगढ़ किले का भूतिया रहस्य ?


मृत्यु जीवन का अटल सत्य है, जिसे भगवान भी नहीं टाल सकते । गीता में कहा गया है जो पैदा हुआ है वह एक ना एक दिन मृत्यु को प्राप्त होगा। एक व्यक्ति अपने जीवन में बहुत सी बातों का सामना करता है जैसे सफलता-विफलता,सुख-दुःख, राग-द्वेष,लाभ-हानि, अमीरी-गरीबी, आशा-निराशा। अपने जीवन काल में अधूरी रह जाने वाली इच्छाओं को पूरा करने के लिए आत्मा मृत्यु के बाद भी यहाँ वहाँ भटकती रहती है और इस दुनिया से मुक्त नहीं हो पाती। समय समय पर ऐसी भटकती आत्माएं जिन्दा व्यक्तियों को अपने होने का एहसास कराती हैं, उन्हें छूने की कोशिश करती हैं, बात करने की कोशिश करती हैं , अपना दुःख बांटने अपनी बात बताने की कोशिश करती हैं। ये आत्माएं व्यक्ति के शरीर के अंदर प्रवेश करना चाहती हैं।


भारत में ऐसे बहुत से स्थान हैं जहाँ जाना किसी खतरे से खाली नहीं। अगर हम किसी ऐसे स्थान पर जाते हैं तो हम अपनी मृत्यु को निमंत्रण देते हैं। इन्ही स्थानों में से एक है भानगढ़ का किला।
भानगढ़ की कहानी बड़ी ही रोचक और डरावनी है। भानगढ़ का किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। इसका निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ था। इसे मान सिंह प्रथम ने अपने छोटे भाई माधो सिंह प्रथम के लिए बनवाया था। इस किले का नामकरण राजा भान सिंह के नाम पर है जो माधो सिंह के दादा थे। इसके निर्माण के 300 सालो तक  भानगढ़ खूब फलता फूलता रहा और तरक्की के पथ पर अग्रसर रहा।
भानगढ़ किले की राजकुमारी थी रत्नावती जो बहुत ही सुन्दर थी। राजकुमारी की सुंदरता के किस्से दूसरे राज्यों में भी फैले थे। काले जादू में महारथ तांत्रिक सिंधु सेवड़ा रत्नावती पर आसक्त हो जाता है। काम वासना में डूबा हुआ तांत्रिक राजकुमारी को वश में करने लिए काला जादू करता है पर वह खुद ही उस काला जादू का शिकार हो कर मर जाता है। पर मरने से पहले भानगढ़ को सब कुछ नष्ट होने का श्राप दे जाता है। और यह भी कहता है की मरने वाले लोगों का कभी पुनर्जन्म भी नहीं होगा। उसके श्राप की वजह से एक महीने बाद ही पड़ोसी राज्य से युद्ध में राजकुमारी सहित सारे भानगढ़ वासी मारे जाते हैं।  भानगढ़ बर्बाद और वीरान हो जाता है। तब से वीरान हुआ भानगढ आज तक वीरान है और कहते है कि मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते है।क्योकि तांत्रिक के श्राप के कारण उन सब कि आत्मा मुक्त नहीं हो पायी।


इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा इस क्षेत्र में सूर्यास्‍त के बाद किसी भी व्‍यक्ति के रूकने की अनुमति नहीं है।



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